Unlock Complete Judiciary Test Series

Subscribe now for full access to all premium judiciary questions.

Question 1
MOST EXPECTED
जब कोई आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा अपने सब के सामान्य आशय को अग्रसर करने में किया जाता है, तब उन व्यक्तियों में से हर व्यक्ति दायित्व के अधीन है:-
  1. कार्य को करने के प्रयत्न के लिए
  2. मानो कार्य उनमे से प्रत्येक ने अकेले ही किया हो
  3. केवल उस भाग के लिए जो प्रत्येक ने किया है
  4. कार्य के दुष्प्रेरण के लिए
Question 2
MOST EXPECTED
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है:-
  1. अधिभोगी का यह सामान्य कर्तव्य है कि वह अधिभोगी की अनुमति से अपने परिसर में रखे गए अपने अभ्यागत के माल की तीसरे पक्षकार द्वारा चोरी से रक्षा करे
  2. अधिभोगी का यह कर्तव्य नहीं है कि वह अपने अभ्यागत के अपने परिसर में रखे गए माल की तीसरे पक्षकार द्वारा चोरी से रक्षा करे
  3. परिसर का अधिभोगी स्वाधीन ठेकेदार की उपेक्षा के लिए आमंत्रित व्यक्ति के प्रति अनिवार्यत: दायी है
  4. अधिभोगी, दोषपूर्ण परिसर द्वारा कारित क्षति के लिए तभी दायी होगा, जब वह परिसर के अनन्य अधियोग में हो
Question 3
MOST EXPECTED
भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत हर मामले में, जिसमें मृत्यु का दण्डादेश दिया गया हो, उस दण्ड को अपराधी की सम्मति के बिना भी समुचित सरकार इस संहिता द्वारा उपबंधित किसी अन्य दण्ड में लघुकृत कर सकेगी यह प्रावधान वर्णित है:-
  1. धारा 55
  2. धारा 54
  3. धारा 52
  4. धारा 53
Question 4
MOST EXPECTED
एक व्यक्ति जो अहं चिकित्सक नहीं है, किसी रोगी की सम्मति से शल्य क्रिया करता है| रोगी की मृत्यु हो जाती है| उसके दायित्व निर्धारण के लिए कौन सा आधार सबसे अधिक उपर्युक्त है:-
  1. उसका मारने का कोई आशय नहीं था और उसने श्रद्धापूर्वक उस व्यक्ति के फायदे के लिए शल्य क्रिया की थी
  2. स्वेच्छा से स्वीकृत क्षति समग्र प्रतिरक्षा है
  3. वह चिकित्सा व्यवसायी नहीं है और अकुशल है, इसलिए सम्मति और सद्धाव का कोई स्थान नहीं है
  4. उसने सफलतापूर्वक इस प्रकार की शल्य क्रियाएँ की थी
Question 5
MOST EXPECTED
निम्नलिखित में से कौन सा एक मत्तता की प्रतिरक्षा के मामले में सही नहीं है:-
  1. मत्तता प्रतिरक्षा है, जब मत्त व्यक्ति कार्य करते समय कार्य की प्रकृति जानने में असमर्थ है
  2. जिस अभियुक्त ने स्वेच्छा से मत्त होकर कार्य किया है, उसके साथ ऐसे बरता जाता है, मानों उसका विशिष्ट आशय या ज्ञान न हो
  3. मत्तता की प्रतिरक्षा का प्रयोग स्वेच्छापूर्वक मत्तता की दशा में भी हो सकता है और अस्वैच्छिक मत्तता की दशा में भी
  4. मत्तता प्रतिरक्षा है जब मत्त व्यक्ति कार्य करते समय यह जानने में असमर्थ है कि जो वह कर रहा है, वह दोषपूर्ण है या विधि के प्रतिकूल है