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क' अपने वाद में कुछ संशोधन करना चाहता है| प्रतिवादी ऐसे संशोधनों का विरोध करता है| न्यायालय को संशोधन की अनुमति देना चाहिए या नही| यदि नहीं,तो कब-
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Aजब वाद की प्रकृति में सारभूत परिवर्तन हो जाता है
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Bजब वाद के विचारण में विलम्ब होने की सम्भावना हो
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Cजब सही निष्कर्ष पर पंहुचने के लिए ऐसा किया जाना आवश्यक हो
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Dजब ऐसा किया जाना वाद की बाहुल्यता को रोकने के लिए आवश्यक हो
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सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत अभिवचन को संशोधित किया जा सकता है-
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Aप्रथम अपीलीय न्यायालय के समक्ष
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Bविचारण न्यायालय के समक्ष
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Cद्वितीय अपीलीय न्यायालय के समक्ष
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Dकेवल (a) तथा (c) के समक्ष
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वाद में सी.पी.सी. के तहत संशोधन किया जा सकता है
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Aआदेश 6 नियम 17 के अन्तर्गत
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Bआदेश 6 नियम 18 A के अन्तर्गत
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Cआदेश 6 नियम 16 के अन्तर्गत
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Dआदेश 6 नियम 18 के अन्तर्गत
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सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 17 के अन्तर्गत न्यायालय किसी कार्यवाही को परिवर्तित या संशोधित करने की अनुज्ञा दे सकता है :
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Aकेवल प्रतिवादी को
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Bकेवल वादी को
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Cकिसी भी पक्षकार को
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Dकेवल एक प्रतिवादी को यदि एक से अधिक प्रतिवादी हो
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न्यायालय ने वादी को वादपत्र में संशोधन की अनुमति प्रदान कर दी किन्तु संशोधन के लिए कोई समय निर्धारित नहीं किया| वादी को संशोधन कितने समय में कर देना चाहिए ?
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Aचौदह दिन
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Bदस दिन
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Cतीस दिन
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Dसात दिन
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