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1
दण्ड प्रकिया संहिता, 1973 निम्न दिनांक से प्रभावशाली हुई :-
  • A
    1 जनवरी, 1973
  • B
    1 अप्रैल, 1974
  • C
    26 जनवरी, 1974
  • D
    1 अप्रैल, 1973
2
"अजमानतीय अपराध" से अभिप्रेत है:-
  • A
    केवल वे अपराध, जो दण्ड प्रकिया संहिता की प्रथम अनुसूची में अजमानतीय बताए गए है
  • B
    ऐसा अपराध कि जिसके लिए पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती
  • C
    ऐसा अपराध जिसके लिए पुलिस वारंट के बिना गिरफ्तार कर सकती है
  • D
    वे सभी अन्य अपराध जो दण्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन प्रथम अनुसूची में या तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि द्वारा "जमानतीय अपराध" नहीं बताए गए है
3
धारा 438 दण्ड प्रकिया संहिता के अधीन जमानत हेतु आदेश दिया जा सकता है :-
  • A
    जमानतीय तथा गैर जमानतीय दोनों ही प्रकार के अपराधों के संबंध में
  • B
    केवल गिरफ्तारी उपरान्त
  • C
    केवल ऐसे न्यायालय द्वारा जो उस अपराध के विचारण हेतु अधिकृत हो
  • D
    केवल अजमानतीय अपराधों के संबंध में
4
धारा 438 एवं 439 दण्ड प्रकिया संहिता के प्रावधानों में एक समान बात यह है कि :-
  • A
    इन प्रावधानों के अधीन कोई भी आदेश केवल उच्च न्यायालय द्वारा ही पारित किया जा सकता है
  • B
    इन दोनों प्रावधानों के अधीन आदेश अभियुक्त की गिरफ्तारी के पूर्व दिया जा सकता है
  • C
    इन दोनों में से किसी भी प्रावधान के अधीन पारित आदेश केवल गिरफ्तारी पर ही प्रभावशील होगा
  • D
    ये दोनों प्रावधान केवल उसी दशा में प्रवृत होंगे जब न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट प्रसारित किया गया हो
5
दण्ड प्रकिया संहिता के अधीन एक प्राइवेट व्यक्ति द्वारा ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी की जा सकती है:-
  • A
    जो उद्धोषित अपराधी है
  • B
    जो उसकी उपस्थिति में अजमानतीय अपराध कारित करता है
  • C
    जो अजमानतीय और असंज्ञेय अपराध कारित करने का आरोपी है
  • D
    जो उसकी उपस्थिति में संज्ञेय अपराध कारित करता है

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